पूर्व फौजी मनोज उपाध्याय को किसान सम्मान

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में खेती को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे पूर्व फौजी मनोज उपाध्याय ने देश सेवा के बाद गांव लौटकर कृषि को अपना मिशन बनाया। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने खेती-बागवानी पर ध्यान केंद्रित किया और नई तकनीकों को अपनाने का प्रयास किया।
मनोज उपाध्याय का मानना है कि पहाड़ में पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ पलायन की समस्या को भी कम करने में मदद मिल सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने कृषि क्षेत्र में नए प्रयोग किए।
पूर्व सैनिक का खेती के प्रति समर्पण केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है। वह अन्य किसानों को भी आधुनिक कृषि पद्धतियों और तकनीकों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनके प्रयास पहाड़ के किसानों के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बन रहे हैं।
किसान मेले में मनोज उपाध्याय को उनके कृषि क्षेत्र में योगदान और पहाड़ में नई तकनीक के माध्यम से खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने से उनके कृषि कार्यों को नई पहचान मिली है।
पूर्व फौजी की यह पहल उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित रोजगार को बढ़ावा देने की संभावनाओं को भी सामने लाती है। सेना में देश सेवा के बाद खेती के जरिए अपनी मिट्टी और गांव की सेवा करने की उनकी कहानी अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक है।



