
चीन की भूमिका को लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य में नई बहस छिड़ गई है। कुछ एक्सपर्ट्स ने आशंका जताई है कि इस अहम समुद्री मार्ग पर चीन अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पर्दे के पीछे बड़े रणनीतिक कदम उठा रहा है, जिसे तख्तापलट जैसी स्थिति की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम केंद्र है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा ऊर्जा संसाधनों का गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का नियंत्रण या प्रभाव बढ़ाना वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। चीन की बढ़ती आर्थिक और सामरिक मौजूदगी ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है।
हालांकि, इस तरह के दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कई विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल रणनीतिक अटकलें भी हो सकती हैं, क्योंकि मौजूदा समय में ईरान, अमेरिका और अन्य शक्तियों के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ है।
होर्मुज को लेकर बढ़ती गतिविधियां और दावे इस बात का संकेत हैं कि यह क्षेत्र आने वाले समय में वैश्विक राजनीति का केंद्र बना रह सकता है। हालांकि, तख्तापलट जैसी किसी ठोस साजिश के दावे की पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए इसे सतर्कता के साथ देखने की जरूरत है।



