NPS Vs VPF: रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर? जानें रिटर्न और टैक्स का गणित

रिटायरमेंट के लिए सही निवेश विकल्प चुनना लंबे समय की वित्तीय योजना का अहम हिस्सा है। नौकरीपेशा लोगों के सामने अक्सर NPS और VPF में से किसी एक को चुनने का सवाल आता है। दोनों का उद्देश्य रिटायरमेंट के लिए फंड तैयार करना है, लेकिन इनके रिटर्न, जोखिम और टैक्स नियम अलग हैं।
VPF यानी Voluntary Provident Fund उन कर्मचारियों के लिए है जो अपने EPF खाते में अनिवार्य योगदान के अलावा अतिरिक्त रकम जमा करना चाहते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बाजार से सीधे जुड़ा नहीं होता और EPF की घोषित ब्याज दर के आधार पर रिटर्न मिलता है।
दूसरी तरफ NPS यानी National Pension System बाजार से जुड़ी रिटायरमेंट योजना है। इसमें निवेशक अलग-अलग एसेट क्लास और पेंशन फंड विकल्पों के अनुसार अपना निवेश चुन सकता है। इसलिए इसमें लंबे समय में ज्यादा रिटर्न की संभावना हो सकती है, लेकिन रिटर्न की गारंटी नहीं होती।
टैक्स के मामले में NPS का फायदा खास तौर पर तब महत्वपूर्ण हो सकता है जब नियोक्ता भी NPS में योगदान करता है। PFRDA के अनुसार, नियोक्ता का NPS योगदान आयकर कानून की धारा 80CCD(2) के तहत निर्धारित सीमा तक टैक्स लाभ के लिए पात्र हो सकता है।
NPS में रिटायरमेंट के समय निकासी के भी विशेष नियम हैं। PFRDA की जानकारी के अनुसार, सामान्य निकास पर कुल कॉर्पस का अधिकतम 60% हिस्सा एकमुश्त निकाला जा सकता है और यह हिस्सा धारा 10(12A) के तहत आय में शामिल नहीं किया जाता। शेष राशि का उपयोग नियमों के अनुसार एन्युटी खरीदने में किया जा सकता है।
VPF की खासियत इसकी अपेक्षाकृत स्थिर और सरल प्रकृति है। अगर निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव से बचना चाहता है और पहले से EPF में योगदान कर रहा है, तो अतिरिक्त बचत के लिए VPF एक विकल्प हो सकता है। हालांकि ब्याज दर भविष्य में बदल सकती है।
वहीं NPS उन निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकता है जो लंबी अवधि के निवेश में बाजार आधारित रिटर्न की संभावना चाहते हैं। NPS में एसेट एलोकेशन और निवेश विकल्पों को लेकर लचीलापन भी मिलता है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि NPS या VPF में से एक हर व्यक्ति के लिए बेहतर है। अगर आपकी प्राथमिकता कम जोखिम और स्थिर रिटायरमेंट बचत है, तो VPF उपयोगी हो सकता है। वहीं लंबी अवधि में ग्रोथ और बाजार आधारित रिटर्न की संभावना चाहते हैं तो NPS पर विचार किया जा सकता है।
टैक्स व्यवस्था भी फैसला लेते समय बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर नए टैक्स रिजीम में NPS के अलग-अलग टैक्स लाभों की उपलब्धता व्यक्ति के योगदान के प्रकार पर निर्भर करती है। इसलिए निवेश करने से पहले अपनी टैक्स व्यवस्था और नियोक्ता के योगदान की सुविधा को जरूर जांचें।
कुल मिलाकर रिटायरमेंट प्लानिंग में केवल ज्यादा रिटर्न देखना पर्याप्त नहीं है। निवेशक को जोखिम, टैक्स, लॉक-इन, निकासी के नियम और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली आय को साथ में देखना चाहिए। कई लोगों के लिए NPS और EPF/VPF को मिलाकर पोर्टफोलियो बनाना भी एक विकल्प हो सकता है।



