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पहली बार भारत आएंगे जापानी F-2

भारत और जापान की सैन्य साझेदारी अब आसमान में भी नई ऊंचाई हासिल करने जा रही है। जापान पहली बार अपने लड़ाकू विमानों को भारत भेज रहा है। जापानी F-2 फाइटर जेट राजस्थान में होने वाले Veer Guardian 26 युद्धाभ्यास में भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों के साथ प्रशिक्षण करेंगे।

जापान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक Veer Guardian 26 का आयोजन 9 से 21 सितंबर के बीच किया जाएगा। इस अभ्यास के लिए जापान अपनी एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के लड़ाकू विमानों को भारत भेजेगा। जापानी रक्षा मंत्री ने अगस्त में भारत दौरे के दौरान भी इस ऐतिहासिक तैनाती को दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था।

जापान की ओर से इस अभ्यास में Mitsubishi F-2 फाइटर जेट शामिल होंगे। ये विमान जापान के प्रमुख मल्टीरोल लड़ाकू विमानों में गिने जाते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक जापान तीन F-2 विमानों और करीब 110 सैन्यकर्मियों को भारत भेजने की तैयारी में है।

यहां एक बात स्पष्ट करना जरूरी है। भारत और जापान के बीच लड़ाकू विमान अभ्यास पहली बार नहीं हो रहा है। जनवरी 2023 में Veer Guardian 23 के दौरान भारतीय वायुसेना के Su-30MKI और जापान के F-2 तथा F-15 विमानों ने जापान में संयुक्त प्रशिक्षण किया था। उस समय भारतीय Su-30MKI जापान गए थे। अब पहली बार जापानी लड़ाकू विमान भारत आ रहे हैं।

इस लिहाज से Veer Guardian 26 को दोनों देशों के एयर फोर्स सहयोग में एक महत्वपूर्ण अगला कदम माना जा रहा है। विदेशी जमीन पर लड़ाकू विमानों की तैनाती से सिर्फ पायलटों को प्रशिक्षण नहीं मिलता, बल्कि दोनों वायुसेनाओं के बीच ऑपरेशनल तालमेल, संचार और रणनीतिक समझ भी बेहतर होती है।

भारतीय वायुसेना इस अभ्यास में अपने Su-30MKI जैसे भारी और लंबी दूरी की क्षमता वाले लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करेगी। Su-30MKI भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण एयर-सुपीरियॉरिटी प्लेटफॉर्म में से एक है और इसे भारत में HAL द्वारा बनाया जाता है।

जापान के F-2 और भारत के Su-30MKI की क्षमताएं काफी अलग हैं। F-2 अपेक्षाकृत हल्का मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जबकि Su-30MKI एक बड़ा, ट्विन-इंजन और लंबी दूरी का फाइटर है। दोनों के बीच प्रशिक्षण से अलग-अलग ऑपरेशनल परिस्थितियों में लड़ाकू रणनीतियों को समझने का अवसर मिलेगा।

अब सवाल उठता है कि इस अभ्यास से चीन की टेंशन क्यों बढ़ सकती है? इसकी सबसे बड़ी वजह दोनों देशों की रणनीतिक स्थिति है। भारत और जापान दोनों इंडो-पैसिफिक में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंतित रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों की वायु सेनाओं का सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है।

हालांकि, भारत और जापान ने इस अभ्यास को चीन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी के रूप में पेश नहीं किया है। आधिकारिक तौर पर इसका उद्देश्य दोनों वायु सेनाओं के बीच आपसी समझ और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना है। जापान के रक्षा मंत्रालय ने दोनों देशों के सैन्य अभ्यासों को और जटिल बनाने तथा भविष्य में अधिक संयुक्त प्रशिक्षण की दिशा में आगे बढ़ने पर भी जोर दिया है।

फिर भी इसकी रणनीतिक अहमियत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जापान लंबे समय से चीन की सैन्य शक्ति बढ़ने को अपनी सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती मानता रहा है। भारत भी हिंद महासागर और अपनी उत्तरी सीमाओं पर चीन की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग का विस्तार स्वाभाविक रूप से बीजिंग के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

इस अभ्यास का एक और महत्वपूर्ण पहलू जापानी लड़ाकू विमानों की भारत तक तैनाती है। किसी देश के फाइटर जेट को लंबी दूरी तय करके दूसरे देश में ऑपरेशनल वातावरण में भेजना अपने आप में जटिल प्रक्रिया होती है। इससे लॉजिस्टिक्स, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग, रखरखाव और तैनाती क्षमता जैसे क्षेत्रों में भी अनुभव हासिल होता है।

भारत के लिए भी यह अभ्यास काफी अहम है। भारतीय वायुसेना को जापान की एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं से सीखने का मौका मिलेगा। वहीं जापान को भारतीय वायुसेना के Su-30MKI जैसे प्लेटफॉर्म के साथ वास्तविक प्रशिक्षण अनुभव प्राप्त होगा।

भारत-जापान रक्षा सहयोग सिर्फ लड़ाकू विमान अभ्यास तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच Army का Dharma Guardian और Navy का JAIMEX जैसे अभ्यास भी होते हैं। अगस्त 2026 में दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को और गहरा करने तथा समुद्री सुरक्षा, संयुक्त अभ्यास और अन्य सैन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

जापान और भारत के बीच रक्षा संबंधों में एक और दिलचस्प पहलू Quad भी है। भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया इस मंच के सदस्य हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्र एवं खुले समुद्री क्षेत्र तथा क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर देते हैं। ऐसे में भारत-जापान के द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों को व्यापक इंडो-पैसिफिक रणनीति के संदर्भ में भी देखा जाता है।

आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और बढ़ सकता है। जापान के रक्षा मंत्रालय ने भारत के साथ अभ्यासों में जटिलता बढ़ाने, मानवरहित प्रणालियों को शामिल करने और जरूरत पड़ने पर कम समय में संयुक्त अभ्यास करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है।

इस पूरे घटनाक्रम का संदेश साफ है—भारत और जापान अब रक्षा सहयोग को सिर्फ राजनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि इसे वास्तविक सैन्य प्रशिक्षण और ऑपरेशनल सहयोग तक ले जा रहे हैं। पहली बार जापानी लड़ाकू विमानों का भारत आना इसी बदलाव का बड़ा संकेत है।

चीन के लिए इसका अर्थ यह है कि इंडो-पैसिफिक में दो प्रमुख एशियाई शक्तियों के बीच सैन्य तालमेल लगातार मजबूत हो रहा है। हालांकि इसे किसी नए सैन्य गठबंधन के रूप में देखना जल्दबाजी होगी, लेकिन भारत-जापान की बढ़ती एयर कॉम्बैट साझेदारी क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर जरूर असर डाल सकती है।

कुल मिलाकर, Veer Guardian 26 सिर्फ एक नियमित सैन्य अभ्यास नहीं है। जापानी F-2 लड़ाकू विमानों की पहली भारत यात्रा दोनों देशों के रक्षा संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम है। राजस्थान के आसमान में जापान के F-2 और भारत के Su-30MKI की संयुक्त ट्रेनिंग से दोनों वायुसेनाओं की ऑपरेशनल समझ बढ़ेगी और इंडो-पैसिफिक में भारत-जापान की रणनीतिक साझेदारी को भी नया बल मिलेगा।

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