FD vs RD: ₹10 लाख FD या ₹10,000 की RD, 10 साल में कौन बनाएगा ज्यादा पैसा?
बैंकिंग और निवेश की दुनिया में FD और RD दोनों ही सुरक्षित बचत विकल्प माने जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि अगर आपके पास ₹10 लाख की रकम है या आप हर महीने ₹10,000 बचा सकते हैं, तो 10 साल में कौन-सा विकल्प ज्यादा पैसा बना सकता है?
FD यानी Fixed Deposit में एकमुश्त रकम जमा की जाती है। उदाहरण के लिए ₹10 लाख FD में लगाने पर पूरी रकम पहले दिन से ब्याज कमाना शुरू कर देती है। बैंक आमतौर पर FD पर ब्याज को तिमाही आधार पर कंपाउंड करते हैं, हालांकि दर और नियम बैंक के अनुसार अलग हो सकते हैं।
दूसरी ओर RD यानी Recurring Deposit में हर महीने एक तय रकम जमा करनी होती है। अगर आप ₹10,000 की RD करते हैं, तो एक साल में ₹1.20 लाख और 10 साल में कुल ₹12 लाख जमा करेंगे। हर किस्त को ब्याज मिलने की अवधि अलग होती है, इसलिए RD की गणना FD से अलग होती है।
मौजूदा दरों का उदाहरण लें तो अप्रैल-जून 2026 में पोस्ट ऑफिस की 5 साल की टाइम डिपॉजिट दर 7.5% और RD की दर 6.7% रही थी। हालांकि बैंक और अलग-अलग योजनाओं में ब्याज दरें अलग हो सकती हैं, इसलिए वास्तविक रिटर्न निवेश संस्था और अवधि पर निर्भर करेगा।
अगर ₹10 लाख की FD को करीब 7.5% सालाना दर पर 10 साल तक बढ़ाया जाए और दर पूरी अवधि में समान मानी जाए, तो कंपाउंडिंग के कारण रकम काफी बढ़ सकती है। लेकिन वास्तविक जीवन में FD को मैच्योरिटी पर दोबारा निवेश करने पर उस समय लागू ब्याज दर के हिसाब से गणना बदल सकती है।
वहीं ₹10,000 की मासिक RD में 10 साल के दौरान आपका कुल निवेश ₹12 लाख होगा। 7.5% सालाना दर के उदाहरण में एक सामान्य RD कैलकुलेशन के अनुसार रकम करीब ₹17.4 लाख के आसपास पहुंच सकती है। वास्तविक बैंक गणना उनकी कंपाउंडिंग पद्धति और लागू ब्याज दर पर निर्भर करेगी।
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि ₹10 लाख FD और ₹10,000 मासिक RD की सीधी तुलना पूरी तरह समान निवेश की तुलना नहीं है। FD में शुरुआत में ₹10 लाख लगाए जा रहे हैं, जबकि RD में 10 साल में कुल ₹12 लाख धीरे-धीरे जमा किए जाते हैं। इसलिए निवेश की राशि और निवेश का समय दोनों को ध्यान में रखना जरूरी है।
अगर आपके पास पहले से बड़ी एकमुश्त रकम मौजूद है और आपको निश्चित रिटर्न वाला विकल्प चाहिए, तो FD उपयोगी हो सकती है। वहीं जिन लोगों के पास बड़ी रकम एक साथ नहीं है लेकिन वे हर महीने नियमित बचत कर सकते हैं, उनके लिए RD ज्यादा व्यावहारिक विकल्प हो सकती है।
निवेश करने से पहले सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। FD और RD के मामले में टैक्स, TDS, समय से पहले निकासी के नियम और मैच्योरिटी के बाद मिलने वाली दर जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी है। बैंक की मौजूदा दरों की जांच करके ही अंतिम फैसला लेना बेहतर रहेगा।
यानी FD उन लोगों के लिए बेहतर है जिनके पास एकमुश्त पैसा है, जबकि RD नियमित मासिक बचत करने वालों के लिए उपयोगी है। 10 साल की योजना में सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कौन ज्यादा रकम देता है; यह भी देखना जरूरी है कि आपने कुल कितना पैसा और कितने समय तक निवेश किया।



