
पार्किंसंस रोग की शुरुआती पहचान कई बार इसलिए चूक जाती है क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और सामान्य थकान या उम्र बढ़ने की प्रक्रिया जैसे लग सकते हैं। न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार हाथों में हल्की कंपकंपी, मांसपेशियों में जकड़न या चलने में थोड़ी परेशानी को अक्सर लोग गंभीरता से नहीं लेते, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि शुरुआती चरण में लक्षण इतने हल्के होते हैं कि मरीज खुद भी उन्हें नजरअंदाज कर देता है। इसके अलावा जानकारी की कमी और नियमित जांच न कराना भी देर से निदान का बड़ा कारण है। कई बार इसे तनाव या कमजोरी समझकर घरेलू उपायों पर छोड़ दिया जाता है।
डॉक्टरों का कहना है कि समय पर पहचान और इलाज शुरू होने से इस बीमारी की प्रगति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, न्यूरोलॉजिकल लक्षणों के प्रति जागरूकता और तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।



