
Saint Petersburg रूस का दूसरा सबसे बड़ा शहर, प्रमुख समुद्री केंद्र और राष्ट्रपति Vladimir Putin का गृह नगर माना जाता है। ऐसे में यहां हुआ यूक्रेनी हमला केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि रूस को राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोन का उपयोग कर सेंट पीटर्सबर्ग के तेल निर्यात टर्मिनल और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। हमले के कारण कई स्थानों पर आग लग गई और शहर के कुछ हिस्सों में हवाई यातायात भी अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ।
हमले का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य सेंट पीटर्सबर्ग का ऑयल टर्मिनल बताया जा रहा है, जो बाल्टिक क्षेत्र में रूस के प्रमुख पेट्रोलियम निर्यात केंद्रों में गिना जाता है। यूक्रेन लंबे समय से रूस की ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाकर उसकी युद्ध क्षमता और राजस्व पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।
इसके अलावा, रिपोर्टों में Kronstadt Naval Base के आसपास स्थित नौसैनिक सुविधाओं और एक रूसी युद्धपोत को भी निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह रूस की समुद्री सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती मानी जाएगी।
इस हमले की टाइमिंग भी बेहद अहम रही। यह कार्रवाई उस समय हुई जब सेंट पीटर्सबर्ग में रूस का प्रमुख आर्थिक सम्मेलन चल रहा था, जिसे अक्सर “रूसी दावोस” कहा जाता है। ऐसे मौके पर हमला करके यूक्रेन ने यह दिखाने की कोशिश की कि रूस के सबसे सुरक्षित और प्रतिष्ठित शहर भी उसकी पहुंच से बाहर नहीं हैं।
सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, सेंट पीटर्सबर्ग यूक्रेनी सीमा से सैकड़ों किलोमीटर दूर है। इतनी दूरी पर सफल ड्रोन हमला यह संकेत देता है कि यूक्रेन की लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता और खुफिया नेटवर्क पहले की तुलना में कहीं अधिक सक्षम हो चुके हैं।
कुल मिलाकर, सेंट पीटर्सबर्ग पर हमला रूस को सैन्य नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ यह संदेश देने की कोशिश भी है कि युद्ध अब केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा। यह रूस की आंतरिक सुरक्षा, ऊर्जा अवसंरचना और रणनीतिक प्रतिष्ठा पर दबाव बढ़ाने वाली कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।



