
भारत और नेपाल के बीच 75 साल पुरानी मैत्री संधि को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। यह संधि दोनों देशों के बीच खुली सीमाओं, व्यापार और नागरिकों की आवाजाही जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को परिभाषित करती है।
हाल के राजनीतिक बदलावों और नई नेतृत्व शैली को देखते हुए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस संधि के कुछ प्रावधानों की समीक्षा या “रीसेट” की संभावना पर विचार किया जा सकता है, ताकि मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार रिश्तों को और मजबूत किया जा सके।
काठमांडू की नई राजनीतिक व्यवस्था और बालेन शाह के नेतृत्व में उभरती नीतियों को भी भारत-नेपाल संबंधों के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच सहयोग का नया रास्ता संवाद, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा के संतुलन पर आधारित हो सकता है, जिससे पारस्परिक हितों को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।



