High Fiber Atta: गेहूं की जगह ये 5 आटे खाएं, रोटी रहेगी स्वादिष्ट और फाइबर भी बढ़ेगा

रोटी भारतीय खाने का अहम हिस्सा है और इसे पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। अगर आपकी रोज की डाइट में फाइबर और पोषक तत्व बढ़ाने का लक्ष्य है, तो गेहूं के आटे में कुछ दूसरे अनाज और दालों के आटे मिलाकर रोटी को ज्यादा पौष्टिक बनाया जा सकता है। WHO भी साबुत अनाज, सब्जियों, फलों और दालों से पर्याप्त फाइबर लेने की सलाह देता है।
1. रागी का आटा: रागी यानी फिंगर मिलेट फाइबर के साथ कैल्शियम और दूसरे मिनरल्स का भी स्रोत है। इसकी रोटी को गेहूं के आटे के साथ मिलाकर बनाया जा सकता है। इससे रोटी में स्वाद और पोषण दोनों बढ़ते हैं।
2. ज्वार का आटा: ज्वार एक साबुत अनाज है और इसमें फाइबर के साथ कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। ज्वार की रोटी या गेहूं-ज्वार के मिश्रण की रोटी रोज के खाने में शामिल की जा सकती है। साबुत अनाज आम तौर पर रिफाइंड अनाज की तुलना में ज्यादा फाइबर देते हैं।
3. बाजरे का आटा: बाजरा भी फाइबर से भरपूर मिलेट विकल्प है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी मिलते हैं। खासकर सर्दियों में बाजरे की रोटी भारतीय घरों में खूब खाई जाती है, लेकिन इसे मौसम के अलावा अपनी पसंद और डाइट के हिसाब से भी खाया जा सकता है।
4. बेसन: चने से बना बेसन सिर्फ पकौड़े या चीला बनाने के काम नहीं आता। इसमें प्रोटीन और फाइबर दोनों मिलते हैं। गेहूं के आटे में सीमित मात्रा में बेसन मिलाकर रोटी बनाई जा सकती है। इससे रोटी की पौष्टिकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
5. ओट्स का आटा: ओट्स में खास तरह का घुलनशील फाइबर बीटा-ग्लूकन पाया जाता है। साबुत ओट्स को पीसकर आटे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे गेहूं के आटे के साथ मिलाकर रोटी बनाने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।
अगर आप पहली बार इन आटों को डाइट में शामिल कर रहे हैं, तो गेहूं का आटा पूरी तरह बदलने के बजाय शुरुआत में मिश्रण बनाना आसान रहता है। उदाहरण के लिए गेहूं के आटे में रागी, ज्वार या बेसन की थोड़ी मात्रा मिलाकर रोटी बनाई जा सकती है। इससे स्वाद और बनावट भी आसानी से एडजस्ट हो जाती है।
फाइबर बढ़ाने का मतलब सिर्फ आटा बदलना नहीं है। दाल, चना, राजमा, सब्जियां, फल, बीज और साबुत अनाज को डाइट में शामिल करना भी जरूरी है। WHO के मुताबिक 10 साल से अधिक उम्र के लोगों को रोजाना कम से कम 25 ग्राम प्राकृतिक डाइटरी फाइबर लेने का लक्ष्य रखना चाहिए।
इसलिए रोटी को दुश्मन मानकर छोड़ने के बजाय सही आटा चुनना और पूरी डाइट को संतुलित रखना ज्यादा बेहतर तरीका है। हालांकि डायबिटीज, किडनी की बीमारी, ग्लूटेन संबंधी समस्या या किसी अन्य मेडिकल कंडीशन में आटे का चुनाव व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह से करना बेहतर है।



