धूप में भी क्यों कम होता है विटामिन-डी? जानें 3 आम गलतियां

भारत में पर्याप्त धूप के बावजूद बहुत से लोग विटामिन-डी की कमी से जूझ रहे हैं। इसे सुनकर हैरानी होती है, क्योंकि धूप विटामिन-डी का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है। लेकिन असलियत में कई जीवनशैली और आदतों की वजह से शरीर को धूप का सही लाभ नहीं मिलता। सबसे बड़ी वजह है सही समय और सही तरीके से धूप न लेना। सुबह और शाम की हल्की धूप विटामिन-डी बनाने के लिए सबसे अच्छी होती है, लेकिन कई लोग या तो धूप से बचते हैं या केवल शाम के समय थोड़ी देर ही बाहर निकलते हैं। इसके कारण शरीर को पर्याप्त UVB किरणें नहीं मिल पातीं, जो विटामिन-डी बनाने के लिए जरूरी हैं।
दूसरी आम गलती है कि लोग अपनी त्वचा पर सनस्क्रीन या भारी कपड़े लगातार इस्तेमाल करते हैं। हालांकि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन लगातार सनस्क्रीन लगाने या पूरी तरह कपड़े ढकने से UVB किरणें त्वचा तक नहीं पहुँच पातीं, और विटामिन-डी का उत्पादन कम हो जाता है। खासकर ऑफिस में लंबे समय तक बंद कमरे में रहने वाले लोग या शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा होती है।
तीसरी गलती आहार संबंधी होती है। धूप से विटामिन-डी न मिलने पर इसे आहार से पूरा किया जा सकता है, लेकिन भारतीय भोजन में विटामिन-डी की मात्रा अक्सर कम होती है। मछली, अंडे की जर्दी, दूध और फोर्टिफाइड फूड्स विटामिन-डी का अच्छा स्रोत हैं। इनका सेवन न करना या संतुलित मात्रा में न लेना शरीर में विटामिन-डी की कमी को बढ़ा देता है।
इन तीन गलतियों को सुधारकर आप आसानी से विटामिन-डी की कमी को दूर कर सकते हैं। रोजाना सुबह 15-30 मिनट धूप में बैठना, जरूरत के अनुसार सनस्क्रीन का संतुलित उपयोग और विटामिन-डी युक्त आहार लेना बेहद जरूरी है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में हड्डियों और मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने के लिए विटामिन-डी बेहद अहम है। इसलिए धूप के समय, पोषण और जीवनशैली पर ध्यान देकर आप अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं और विटामिन-डी की कमी से बच सकते हैं।



