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ऑस्ट्रेलिया में खरगोश बने मुसीबत, खोजी कुत्तों से तलाश

ऑस्ट्रेलिया में कभी सामान्य और मासूम नजर आने वाले खरगोश अब पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। देश के कई इलाकों में इनकी तेजी से बढ़ती आबादी ने स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव बढ़ा दिया है।

खरगोशों की बड़ी संख्या से स्थानीय वनस्पतियों को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ देशी वन्यजीवों के लिए भी भोजन और रहने की जगह को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इनकी बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया में यूरोपीय खरगोशों को एक प्रमुख आक्रामक प्रजाति माना जाता है। अनुकूल परिस्थितियों में इनकी प्रजनन क्षमता काफी अधिक होती है, जिसके कारण इनकी संख्या तेजी से बढ़ सकती है।

इन खरगोशों को तलाशने और उनकी मौजूदगी का पता लगाने के लिए कुछ क्षेत्रों में प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है। कुत्ते अपनी सूंघने की क्षमता के जरिए जमीन के अंदर बने बिलों और खरगोशों की मौजूदगी का पता लगाने में सहायता करते हैं।

खरगोशों की समस्या केवल खेती तक सीमित नहीं है। इनके कारण मिट्टी का कटाव बढ़ सकता है और प्राकृतिक वनस्पतियों पर दबाव पड़ सकता है। इससे कई देशी प्रजातियों के अस्तित्व पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि खरगोशों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों का इस्तेमाल जरूरी है। इसके लिए लगातार निगरानी, आबादी का आकलन और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नियंत्रण अभियान चलाए जाते हैं।

ऑस्ट्रेलिया का यह मामला बताता है कि किसी एक प्रजाति की संख्या में असंतुलित बढ़ोतरी पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकती है। इसलिए वन्यजीव संरक्षण के साथ आक्रामक प्रजातियों के प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है।

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