ईरान-इजरायल 40 दिन युद्ध: 650 मिसाइल हमले और 10,800 जवाबी हमलों का लेखा-जोखा

ईरान और इजरायल के बीच 40 दिनों तक चले तनावपूर्ण संघर्ष में भारी सैन्य कार्रवाई देखने को मिली। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की ओर से करीब 650 मिसाइल हमले किए गए, जिसके जवाब में इजरायल ने 10,800 से अधिक बार जवाबी हमले किए।
इस पूरे संघर्ष ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर रणनीतिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के आरोप लगाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष आधुनिक युद्ध तकनीक और मिसाइल क्षमता के उपयोग का एक बड़ा उदाहरण है, जिसने क्षेत्रीय स्थिरता को चुनौती दी है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने लगातार दोनों पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
इस संघर्ष के दौरान दोनों देशों की वायु रक्षा प्रणालियों और मिसाइल इंटरसेप्शन तकनीक की भी कड़ी परीक्षा हुई। कई हमलों को हवा में ही रोकने का दावा किया गया, जबकि कुछ हमले संवेदनशील सैन्य और रणनीतिक ठिकानों तक पहुंचने में सफल रहे। इससे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा दबाव देखा गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस 40 दिन के टकराव का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेल की कीमतों, वैश्विक सप्लाई चेन और शेयर बाजारों पर भी इसका असर पड़ा। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र और कई प्रमुख देशों ने लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने और सीजफायर की दिशा में कदम बढ़ाने की अपील की। कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद हालात कई बार और ज्यादा तनावपूर्ण होते दिखे।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह के लंबे संघर्ष भविष्य में क्षेत्रीय गठबंधनों और रक्षा नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे वैश्विक भू-राजनीति में नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।



