Ahmad Shah Massoud: कौन थे अहमद शाह मसूद? 9/11 से दो दिन पहले क्यों हुई हत्या

अफगानिस्तान के इतिहास में अहमद शाह मसूद का नाम एक ऐसे सैन्य कमांडर के तौर पर दर्ज है, जिसने सोवियत सेना से लेकर तालिबान तक के खिलाफ लंबे समय तक संघर्ष किया। उन्हें उनके प्रभाव वाले पंजशीर क्षेत्र के कारण ‘पंजशीर का शेर’ भी कहा जाता था।
सोवियत सेना के खिलाफ संघर्ष
1979 में सोवियत संघ के अफगानिस्तान में सैन्य हस्तक्षेप के बाद मसूद ने मुजाहिदीन के साथ मिलकर सोवियत सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी। पंजशीर घाटी में उनकी रणनीति और गुरिल्ला युद्ध की क्षमता ने उन्हें अफगान प्रतिरोध के प्रमुख चेहरों में शामिल कर दिया।
तालिबान के खिलाफ बने सबसे बड़े चेहरों में एक
सोवियत सेना की वापसी और अफगान गृहयुद्ध के दौर के बाद जब तालिबान तेजी से आगे बढ़ा, तब मसूद ने उसके खिलाफ मोर्चा संभाला। उन्होंने उत्तरी गठबंधन का नेतृत्व किया और तालिबान के बढ़ते प्रभाव के सामने सबसे मजबूत सैन्य प्रतिरोधों में से एक खड़ा किया।
तालिबान के लिए बड़ी चुनौती क्यों थे?
मसूद की सबसे बड़ी ताकत उनका स्थानीय प्रभाव और पंजशीर घाटी में मजबूत पकड़ थी। तालिबान के खिलाफ उनके संगठन ने अफगानिस्तान के उत्तर और उत्तर-पूर्व में महत्वपूर्ण क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखा। यही कारण था कि तालिबान उन्हें अपने सबसे बड़े सैन्य विरोधियों में गिनता था।
9 सितंबर 2001 को क्या हुआ?
11 सितंबर 2001 के अमेरिका पर आतंकी हमलों से सिर्फ दो दिन पहले मसूद की हत्या कर दी गई। हमलावरों ने पत्रकारों का रूप धारण किया और इंटरव्यू के लिए उनके पास पहुंचे। इंटरव्यू के दौरान छिपाए गए विस्फोटक से हमला किया गया, जिसमें मसूद गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मौत हो गई।
अल-कायदा से क्या था कनेक्शन?
कई ऐतिहासिक और खुफिया आकलनों के अनुसार मसूद की हत्या के पीछे अल-कायदा से जुड़े लोगों का हाथ था। उस समय मसूद अल-कायदा और तालिबान के खिलाफ सबसे प्रभावी अफगान नेताओं में से एक थे। इसलिए उनकी हत्या को 9/11 से पहले के व्यापक घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
9/11 से दो दिन पहले ही क्यों?
मसूद की हत्या का समय सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है। 9 सितंबर को उनकी हत्या और 11 सितंबर को अमेरिका में आतंकी हमले के बीच सिर्फ 48 घंटे का अंतर था। माना जाता है कि उनकी हत्या से तालिबान विरोधी उत्तरी गठबंधन को नेतृत्व के स्तर पर कमजोर करने का प्रयास किया गया था। हालांकि 9/11 की साजिश और मसूद की हत्या के बीच पूरी परिचालन कड़ी के सभी विवरण सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हैं।
अमेरिका को पहले चेतावनी दे चुके थे
मसूद ने अपनी हत्या से कुछ समय पहले पश्चिमी देशों को अफगानिस्तान में अल-कायदा और तालिबान से पैदा हो रहे खतरे के बारे में चेताया था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान की स्थिति को गंभीरता से लेने की अपील की थी।
‘पंजशीर के शेर’ की विरासत
मसूद की मौत के बाद भी उनकी राजनीतिक और सैन्य विरासत अफगानिस्तान में बनी रही। उत्तरी गठबंधन ने बाद में तालिबान के खिलाफ अमेरिकी नेतृत्व वाले अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मसूद के समर्थकों के लिए वह आज भी तालिबान के खिलाफ प्रतिरोध और अफगान राष्ट्रवाद का प्रतीक हैं।
अहमद शाह मसूद की कहानी अफगानिस्तान के दशकों लंबे संघर्ष, तालिबान के उदय और अल-कायदा के प्रभाव से जुड़ी हुई है। 9/11 से ठीक दो दिन पहले उनकी हत्या ने इस घटना को और ऐतिहासिक बना दिया। हालांकि मसूद की हत्या और 9/11 के बीच संबंधों को समझते समय स्थापित तथ्यों और बाद के आकलनों के बीच अंतर करना जरूरी है।



