मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। राज्य के वन मंत्री विजय शाह को लेकर विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है और उनकी बर्खास्तगी की ज़ोरदार मांग करते हुए विधानसभा सत्र को पूरी तरह हंगामेदार बना दिया। सत्र की शुरुआत से ही विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी और वेल में उतरकर कार्यवाही को बाधित किया, जिसके चलते सदन को कई बार स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष का आरोप है कि विजय शाह के खिलाफ भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और जनहित की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। उनका कहना है कि जब तक मुख्यमंत्री विजय शाह को कैबिनेट से नहीं हटाते, तब तक सदन में सामान्य कामकाज नहीं होने दिया जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने सदन के बाहर भी प्रदर्शन करते हुए कहा कि “जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने वाले मंत्री को सरकार बचा रही है, जो लोकतंत्र के खिलाफ है।”
विधानसभा में हुए हंगामे का सीधा असर सदन की कार्यवाही पर पड़ा। प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान लगातार व्यवधान उत्पन्न हुआ। विधानसभा अध्यक्ष को कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष के तेवर इतने सख्त रहे कि उन्होंने वॉकआउट तक की चेतावनी दे डाली। इस दौरान कुछ विधायकों ने विजय शाह के खिलाफ जांच की मांग को लेकर दस्तावेज भी लहराए।
सरकार की तरफ से अभी तक कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा कर रहे हैं। भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं का यह भी कहना है कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन बिना जांच के मंत्री को हटाना जल्दबाज़ी होगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। जहां विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई बता रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे विपक्ष की राजनीतिक साजिश कहकर खारिज कर रहा है। विजय शाह ने भी अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि वह किसी भी जांच का सामना करने को तैयार हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अब सिर्फ एक मंत्री के विवाद से आगे निकल चुका है। यह सरकार की छवि, प्रशासनिक पारदर्शिता और राजनीतिक नैतिकता से जुड़ा मुद्दा बन गया है। यदि इस पर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह भाजपा सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक सिरदर्द बन सकता है।
फिलहाल, सारी निगाहें मुख्यमंत्री के अगले कदम पर टिकी हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि विजय शाह को लेकर पार्टी क्या रुख अपनाती है — समर्थन जारी रहेगा या सख्ती दिखाई जाएगी।



