वर्ल्ड मेंटल-हेल्थ डे 2025: रोहिणी निलेकणी द्वारा शुरू किया पहला मेंटल हेल्थ फेस्टिवल

विश्वभर में हर साल 10 अक्टूबर को मनाया जाने वाला वर्ल्ड मेंटल-हेल्थ डे इस वर्ष भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण अवसर बना। इस मौके पर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, तनाव और मानसिक थकान से निपटने के तरीकों पर चर्चा की गई। इस साल का विषय “मानसिक थकान और डिजिटल जीवन” को केंद्र में रखते हुए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों की सोच को बदलने की कोशिश की गई।
दिल्ली में इस अवसर पर रोहिणी निलेकणी ने पहला मेंटल हेल्थ फेस्टिवल शुरू किया, जिसका उद्देश्य लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व और अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखने के तरीकों से अवगत कराना था। फेस्टिवल में विभिन्न सेशन आयोजित किए गए, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए और तनाव, चिंता, अवसाद जैसी समस्याओं से निपटने के व्यावहारिक उपाय बताए।
रोहिणी निलेकणी ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और लगातार डिजिटल कनेक्शन के कारण लोग मानसिक थकान का सामना कर रहे हैं। इस थकान का समाधान सिर्फ डिजिटल डिटॉक्स या सोशल मीडिया से दूरी नहीं है, बल्कि ऑफलाइन कनेक्शन और सामाजिक बातचीत, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने में भी निहित है। उन्होंने बताया कि लोग अक्सर मानसिक समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि समय पर सही दिशा और समर्थन मिलने पर मानसिक स्वास्थ्य में सुधार संभव है।
फेस्टिवल में थेरेपी वर्कशॉप, मेडिटेशन सेशन, आर्ट थेरेपी और मोटिवेशनल स्पीच जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं, जो लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनाने में मददगार साबित हुईं। इसके अलावा, युवाओं और वयस्कों को तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच विकसित करने और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत भलाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की उत्पादकता और खुशहाली में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे कार्यक्रम लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति खुलकर बात करने और मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इस पहल से यह संदेश गया कि मानसिक थकान कोई कमजोरी नहीं, बल्कि हमारे जीवन का हिस्सा है, और इसका समाधान समझदारी और सही प्रयासों से संभव है।
यह फेस्टिवल न केवल मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने वाला कदम है, बल्कि यह समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता को भी बढ़ाने का एक सकारात्मक प्रयास है।



