बच्ची स्कूल जाने से करती थी इनकार, मां ने 60 दिन में बदली आदत; हर पेरेंट सीखें ये तरीका

कई बच्चों का स्कूल जाने का मन नहीं करता और वे सुबह उठते ही रोने, चिड़चिड़ाने या अलग-अलग बहाने बनाने लगते हैं। ऐसे में हर बार इसे सिर्फ जिद या आलस मानना सही नहीं हो सकता। 7 साल की एक बच्ची के मामले में भी यही हुआ, लेकिन उसकी मां ने डांटने के बजाय उसके स्लीप रूटीन पर ध्यान दिया।
मां ने तय किया कि घर में रोज रात 8 बजे सभी लाइट्स बंद कर दी जाएंगी और बच्ची को सोने जाना होगा। यह नियम वीकेंड या घर में मेहमान होने पर भी नहीं बदला। शुरुआत में बच्ची कई बहाने बनाती, पानी मांगती और बार-बार उठती रही, लेकिन मां ने रूटीन को लगातार जारी रखा।
करीब एक सप्ताह बाद बदलाव नजर आने लगा। बच्ची पहले की तरह सुबह चिड़चिड़ी नहीं होती थी, समय पर उठने लगी और स्कूल जाने को लेकर होने वाली रोज की बहस भी कम हो गई। कुछ सप्ताह बाद उसके अटेंशन स्पैन, लर्निंग एबिलिटी और मेमोरी में भी सुधार देखा गया। टीचर ने भी उसके व्यवहार में यह बदलाव नोटिस किया।
इस मामले से पेरेंट्स के लिए सबसे बड़ी सीख यह है कि बच्चे के व्यवहार को तुरंत ‘जिद्दी’ या ‘बदतमीज’ मानने के बजाय उसकी दिनचर्या पर भी नजर डालनी चाहिए। पर्याप्त और अच्छी नींद बच्चे के मूड, ध्यान, सीखने और याददाश्त को प्रभावित कर सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि डॉक्टर पवन मंदाविया ने बताया कि इस उदाहरण में बच्ची उनकी अपनी 7 साल की बेटी है और जिस मां ने यह बदलाव किया, वह उनकी पत्नी हैं। यानी यह केवल किसी मरीज की कहानी नहीं, बल्कि उनके परिवार में आजमाया गया अनुभव है। हालांकि, हर बच्चे की जरूरत अलग होती है और लगातार स्कूल से इनकार करने के पीछे स्कूल का डर, बुलिंग, सीखने की परेशानी या अन्य कारण भी हो सकते हैं।



