Hathras Rabri: क्यों खास है हाथरस की रबड़ी? जानें स्वाद का राज

हाथरस का नाम सुनते ही जहां एक तरफ यहां की पारंपरिक मिठाइयों की याद आती है, वहीं रबड़ी भी शहर की खास पहचान बन चुकी है। दूध को धीमी आंच पर पकाकर तैयार की जाने वाली यह मिठाई अपने गाढ़ेपन और मलाईदार स्वाद के लिए लोगों के बीच लोकप्रिय है।
हाथरस की रबड़ी की खासियत इसके पारंपरिक तरीके से तैयार होने में मानी जाती है। दूध को लंबे समय तक पकाने से उसमें गाढ़ापन आता है और मलाई की परतें इसकी बनावट को खास बनाती हैं। यही पारंपरिक स्वाद इसे बाजार में मिलने वाली सामान्य रबड़ी से अलग पहचान देता है।हाथरस में रबड़ी सिर्फ शहर की दुकानों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों में भी इसका बड़े स्तर पर उत्पादन होता है और यहां तैयार होने वाली रबड़ी दिल्ली तथा दूसरे शहरों तक भेजी जाती है। इसकी मांग शादी-ब्याह, त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के अलावा सामान्य दिनों में भी बनी रहती है।
हाथरस की मशहूर रबड़ी की चर्चा देश के कई हिस्सों में होती रही है। शहर की एक पुरानी दुकान ‘हन्नो लाल रबड़ी वाले’ की रबड़ी करीब 50-60 साल पुरानी परंपरा से जुड़ी बताई जाती है। इस दुकान की तीन पीढ़ियां रबड़ी और मिठाई के कारोबार से जुड़ी रही हैं।
इस रबड़ी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी हाथरस आने के दौरान यहां की रबड़ी का स्वाद ले चुके थे। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, वह हाथरस की रबड़ी के मुरीद थे।
स्वाद के पीछे इस्तेमाल होने वाले दूध की गुणवत्ता भी अहम मानी जाती है। हन्नो लाल रबड़ी वाले के संचालक के अनुसार, उनकी रबड़ी के लिए दूध सीधे गांवों से मंगाया जाता है और भैंस के दूध का इस्तेमाल किया जाता है। धीमी आंच पर पकाने की पारंपरिक प्रक्रिया रबड़ी को गाढ़ी और मलाईदार बनाती है।
हाथरस की रबड़ी को अब स्थानीय बाजार से आगे ले जाने की कोशिश भी हो रही है। उत्तर प्रदेश की ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना के तहत हाथरस की रबड़ी को चुना गया है। इसके जरिए उत्पादन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
यही वजह है कि हाथरस की रबड़ी अब सिर्फ स्थानीय मिठाई नहीं रह गई है, बल्कि यूपी के पारंपरिक खान-पान की पहचान के तौर पर भी सामने आ रही है। अगर आपको गाढ़ी, मलाईदार और पारंपरिक स्वाद वाली मिठाइयां पसंद हैं, तो हाथरस की रबड़ी जरूर चखने लायक है।



