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क्या Anxiety माता-पिता से मिलती है? जानें Genes और Stress का असर

एंग्जायटी यानी चिंता हर व्यक्ति के जीवन का सामान्य हिस्सा हो सकती है। लेकिन जब चिंता लगातार बनी रहे, बहुत ज्यादा हो जाए और रोजमर्रा की जिंदगी, काम या रिश्तों को प्रभावित करने लगे, तो यह एंग्जायटी डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है। एंग्जायटी को केवल Genes से जोड़कर देखना सही नहीं है। National Institute of Mental Health के अनुसार Anxiety और Depression जैसे मानसिक स्वास्थ्य विकार आमतौर पर Genes, जीवन के अनुभवों और वातावरण के मिले-जुले प्रभाव से जुड़े होते हैं।

अगर माता-पिता या परिवार के किसी करीबी सदस्य को एंग्जायटी डिसऑर्डर रहा है, तो व्यक्ति में इसका जोखिम सामान्य से अधिक हो सकता है। हालांकि पारिवारिक इतिहास सिर्फ जोखिम बढ़ाता है, बीमारी होने की गारंटी नहीं देता। कई दूसरे जैविक और पर्यावरणीय कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं। तनाव भी एंग्जायटी के लक्षणों को बढ़ा सकता है। लंबे समय तक तनावपूर्ण माहौल, किसी दर्दनाक घटना का अनुभव, परिवार या रिश्तों से जुड़ी परेशानियां और जीवन में बड़े बदलाव मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं। Generalized Anxiety Disorder में लक्षण तनाव के समय और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।

कई बार बच्चे अपने माता-पिता से सिर्फ Genes ही नहीं, बल्कि व्यवहार और आसपास का वातावरण भी सीखते हैं। इसलिए परिवार में लगातार तनाव या चिंता का माहौल बच्चे के अनुभवों को प्रभावित कर सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि माता-पिता की एंग्जायटी सीधे बच्चे में ट्रांसफर हो जाती है, बल्कि दोनों के बीच जैविक और पर्यावरणीय कारकों का जटिल संबंध हो सकता है।  एंग्जायटी के सामान्य लक्षणों में जरूरत से ज्यादा चिंता, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी, नींद खराब होना, थकान, मांसपेशियों में तनाव और कभी-कभी सांस फूलना या चक्कर जैसा महसूस होना शामिल हो सकता है।

अच्छी बात यह है कि परिवार में एंग्जायटी का इतिहास होने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति इसके लक्षणों से बच नहीं सकता। तनाव को मैनेज करना, पर्याप्त नींद लेना, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेना फायदेमंद हो सकता है। फिलहाल ऐसा कोई सामान्य Genetic Test उपलब्ध नहीं है जो यह सटीक रूप से बता सके कि किसी व्यक्ति को भविष्य में Anxiety Disorder होगा या नहीं। वैज्ञानिक अभी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अलग-अलग Genetic Variations मानसिक स्वास्थ्य पर किस तरह असर डालते हैं।

अगर चिंता लंबे समय तक बनी रहती है या आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है, तो इसे सिर्फ तनाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से बात करके सही कारण और उचित उपचार का पता लगाया जा सकता है।

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