Ovarian Cyst का बिना सर्जरी इलाज, कब खुद ठीक हो जाता है सिस्ट?

ओवरी का सिस्ट एक तरल पदार्थ से भरी थैली होती है, जो अंडाशय में बन सकती है। कई सिस्ट मासिक धर्म चक्र से जुड़े होते हैं और सामान्यतः खतरनाक नहीं होते। functional ovarian cyst अक्सर कुछ समय बाद अपने आप गायब हो जाते हैं।
हार्मोनल बदलाव और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया से जुड़े functional cyst सबसे आम प्रकारों में शामिल हैं। जब फॉलिकल अंडा रिलीज नहीं करता या रिलीज के बाद सामान्य रूप से सिकुड़ता नहीं है, तो वह बढ़कर सिस्ट का रूप ले सकता है।
अगर सिस्ट छोटा है, अल्ट्रासाउंड में सामान्य दिखाई देता है और महिला को कोई खास परेशानी नहीं है, तो डॉक्टर अक्सर watchful waiting यानी निगरानी की रणनीति अपना सकते हैं। इस दौरान तुरंत सर्जरी नहीं की जाती और कुछ हफ्तों या महीनों बाद अल्ट्रासाउंड से देखा जाता है कि सिस्ट खत्म हुआ या नहीं।
बिना सर्जरी सिस्ट को मैनेज करने का मतलब यह नहीं है कि घरेलू नुस्खों से सिस्ट को खत्म किया जा सकता है। सही तरीका सिस्ट के प्रकार और कारण के आधार पर डॉक्टर की निगरानी में तय होता है। अगर सिस्ट किसी दूसरी बीमारी, जैसे एंडोमेट्रियोसिस, से जुड़ा है तो उसका इलाज अलग हो सकता है।
हर ओवरी सिस्ट हार्मोन की वजह से नहीं बनता। कुछ cyst abnormal cell growth या दूसरी स्थितियों के कारण भी हो सकते हैं। इसलिए केवल यह मान लेना कि सिस्ट हार्मोन बिगड़ने से बना है, सही नहीं है। अल्ट्रासाउंड और जरूरत पड़ने पर अन्य जांच से डॉक्टर इसकी प्रकृति समझते हैं।
कुछ परिस्थितियों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। अगर सिस्ट बहुत बड़ा हो, लगातार बना रहे, बढ़ता जाए, दर्द या दूसरे लक्षण पैदा करे या स्कैन में उसकी बनावट चिंताजनक लगे, तो डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह दे सकते हैं।
मेनोपॉज के बाद ओवरी के सिस्ट को लेकर ज्यादा सावधानी बरती जाती है, क्योंकि इस उम्र में ओवरी के कैंसर का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक होता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड और कभी-कभी CA-125 जैसे ब्लड टेस्ट के जरिए निगरानी कर सकते हैं।
अचानक तेज पेल्विक या पेट दर्द, दर्द के साथ उल्टी, चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस होना और तेजी से पेट फूलना जैसे लक्षण नजर आएं तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। ये सिस्ट के फटने, खून बहने या ओवरी के मुड़ने जैसी जटिलताओं के संकेत हो सकते हैं।
इसलिए ओवरी में सिस्ट मिलने पर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। कई मामलों में बिना सर्जरी सिर्फ नियमित निगरानी पर्याप्त हो सकती है, जबकि कुछ सिस्ट में समय पर इलाज जरूरी होता है। सही फैसला अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही लेना चाहिए।



