
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 22 सितंबर 2025 को अमेरिका पहुंचे हैं, जहां वे न्यूयॉर्क में अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो से मुलाकात करेंगे। यह बैठक अमेरिका द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद पहली महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता है।
अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत सामान्य टैरिफ और रूस से कच्चे तेल की खरीद पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ लगाया है। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय निर्यातकों को टेक्सटाइल, चमड़ा, सी-फूड और दवा जैसे क्षेत्रों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन मुद्दों को लेकर भारत और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा है, लेकिन दोनों देशों के नेताओं ने बातचीत के माध्यम से समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने का संकेत दिया है।
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर भी चर्चा हो रही है, जिसका उद्देश्य 2030 तक दोनों देशों के व्यापार को दोगुना करके 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। अब तक इस समझौते पर पांच दौर की वार्ता हो चुकी है, और अक्टूबर-नवंबर 2025 तक पहले चरण को अंतिम रूप देने की योजना है।
इसके अतिरिक्त, अमेरिकी प्रशासन ने H-1B वीजा शुल्क को 1,00,000 अमेरिकी डॉलर कर दिया है, जिसका सीधा असर भारतीय आईटी पेशेवरों और कंपनियों पर पड़ेगा। इस मुद्दे को भी भारत के प्रतिनिधिमंडल द्वारा अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष उठाए जाने की संभावना है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर और सीनेटर मार्को रुबियो की मुलाकात के दौरान इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। दोनों देशों के नेताओं ने पहले ही संकेत दिया है कि वे अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करेंगे।
भारत और अमेरिका के बीच इस समय व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। दोनों देशों के नेताओं की इच्छाशक्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण से उम्मीद जताई जा रही है कि टैरिफ विवाद, व्यापार समझौता और वीजा नीति जैसे मुद्दों पर समाधान निकाला जा सकेगा, जो दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा।



