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ईरान युद्ध पर दक्षिण कोरिया से नाराज ट्रंप, किम जोंग उन को तरजीह

अमेरिका और दक्षिण कोरिया के रिश्तों में ईरान युद्ध को लेकर नई तल्खी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दक्षिण कोरिया के उस रुख से नाराज बताए जा रहे हैं, जिसमें उसने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में सीधे मदद करने से दूरी बनाई।

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि जब अमेरिका अपने सहयोगियों से रणनीतिक समर्थन की उम्मीद करता है, तब सहयोगियों की भूमिका और प्रतिबद्धता स्पष्ट होनी चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन का जिक्र भी महत्वपूर्ण है। ट्रंप पहले भी किम के साथ व्यक्तिगत कूटनीति को अपनी विदेश नीति की उपलब्धि के रूप में पेश करते रहे हैं। ऐसे में दक्षिण कोरिया पर दबाव और किम के प्रति नरम रुख को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सुरक्षा सहयोग लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों की आधारशिला रहा है। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को देखते हुए अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी तथा संयुक्त सैन्य अभ्यासों को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष ने हालांकि अमेरिका की विदेश नीति के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। वाशिंगटन अपने सहयोगियों से अलग-अलग स्तर पर समर्थन की अपेक्षा कर रहा है, जबकि कई देश सीधे सैन्य भागीदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

दक्षिण कोरिया के लिए स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि उसका मुख्य सुरक्षा फोकस कोरियाई प्रायद्वीप और उत्तर कोरिया पर रहता है। ऐसे में मध्य पूर्व के किसी संघर्ष में अतिरिक्त सैन्य संसाधन लगाने का फैसला सियोल के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकता है।

ट्रंप की किम जोंग उन के प्रति प्राथमिकता की चर्चा ऐसे समय हो रही है जब उत्तर कोरिया के साथ अमेरिका के रिश्ते अभी भी अनिश्चित हैं। दोनों नेताओं के बीच पहले व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत और शिखर बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर कोई स्थायी समझौता नहीं हो सका।

दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच मौजूदा मतभेद अगर आगे बढ़ते हैं तो इसका असर एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा रणनीति पर पड़ सकता है। खासकर संयुक्त सैन्य अभ्यास, अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और उत्तर कोरिया के खिलाफ साझा रणनीति पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

फिलहाल ट्रंप के रुख ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया संबंधों और किम जोंग उन के साथ उनकी कूटनीति को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सियोल और वाशिंगटन इस मतभेद को किस तरह संभालते हैं और कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा व्यवस्था पर इसका कितना असर पड़ता है।

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